मां बनना एक औरत के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुख माना जाता है। शादी के बाद मां बनना एक लड़की को ऐसा सुखद अहसास देता है जिससे वह पूर्ण होती है। मां बनने का मतलब है एक नई दुनिया में प्रवेश करना, एक नये जीव से अपना रिश्ता जोड़ना, नई जिम्मेदायों से रु-ब-रु होना। इसके लिए एक महिला ना जाने क्या-क्या ख्वाब सजाती है। बच्चे के इस नई दुनिया में प्रवेश करने से पहले जो सबसे जरूरी चीज है, वह यह है की गर्भावस्था के दौरान महिला अपनी उचित देखभाल करे। ताकि न केवल बच्चा स्वस्थ पैदा हो बल्कि जच्चा भी अपने इस अनुभव का एक सुखद आनंद ले सके।

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अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं के गर्भवती होने के कुछ महीनों बाद एकदम से आराम की सलाह दी जाती है, लेकिन गर्भावस्था में हल्के काम और व्यायाम से जन्म लेने वाले बच्चे को कुछ बीमारियों से बचाया जा सकता है। एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था में व्यायाम से आने वाले बच्चे को भविष्य में अल्जायमर जैसी घातक बीमारियों से बचाया जा सकता है। आज हम भी आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे हैं कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला को कौन-कौन से व्यायाम करने चाहिए।

गर्भावस्था के समय काम-

महिला को गर्भकाल के दौरान हल्के फुल्के काम करते रहना चाहिए, क्योंकि यह दोनों के शरीर में आकार व वजन के बदलने में काफी महत्वपूर्ण होता है। गर्भावस्था में व्यायाम करने से शरीर में जोश व स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही मांसपेशियों व जोड़ों का कसाव, लचीलापन व ताकत बढ़ती है। ऐंठन, कमर दर्द, वेरिकोज वेन और अन्य बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

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गर्भावस्था में काम करते रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी बचा जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाली महिलाओं में रक्तचाप और वजन भी नियंत्रित रहता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित व्यायाम से महिलाओं के गर्भस्थ शिशु का वजन भी सामान्य रहता है।

व्यायाम करने से पहले कुछ जरूरी सुझाव-

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1. व्यायाम करने से पहले हर गर्भवती महिला को अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। यह जानना चाहिए कि कौन सा व्यायाम आपको सूट करेगा।
2. महिला को हमेशा याद रखना चाहिए कि व्यायाम शुरू करने से पहले वार्मअप और कसरत के बाद कूल डाउन होना है। कुछ साधारण कसरत करें जिससे शरीर में लचीलापन बना रहे ताकि चोटिल होने से बचा जा सके।
3. फिट रहने के लिए महिला को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट कसरत करना बहुत ज़रूरी है। वैसे तो हर दिन कसरत करना आइडियल है, लेकिन अगर ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम सप्ताह में 5 दिन कसरत करना तो ज़रूर करें।
4. गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। गर्भवती महिला को शारीरिक परिवर्तन होने के कारण अधिक पानी की आवश्कता पड़ती है इसलिए कसरत करने से पहले और कसरत करने के बाद भी पानी की बराबर मात्रा शरीर में होना आवश्यक है। ऐसे में ग्लूकोज़ वाला पानी ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। पानी हमारे शरीर की रक्त कोशिकाओं और उतकों में आद्रता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। मां के दूध के लिये भी काफी जरूरी होता है।
5. गर्भकाल के दौरान महिलाओं को अक्‍सर पीठ और कमर में दर्द की शिकायत बनी रहती है। इसके लिए इन्हें बैक एक्‍सरसाइज करना चाहिए। ऐसी एक्‍सरसाइज को डॉक्‍टर की सलाह के आधार पर ही करना चाहिए। आप चाहें तो शॉर्ट वॉक भी कर सकती हैं।
6.ऐसे समय में महिला को हल्के व्यायाम करना चाहिए और अधिक थकाने वाले व्यायाम से परहेज करना चाहिए। खासकर गर्मी और नमी वाले दिनों में।
7.व्‍यायाम करने के लिये वैसे तो सभी को प्रेरित किया जाता है क्योंकि यह सभी के लिये अच्छा होता है, लेकिन गर्भकाल के दौरान व्यायाम आपके शरीर में रक्‍त का संचार अच्‍छा करता है। ताजी हवा आपके फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे आपके शरीर को और होने वाले बच्‍चे को काफी लाभ होता है।

कुछ व्यायाम करने की सिफारिशें-

योग- गर्भावस्था के दौरान शरीर का आकार ऐसा हो जाता है जिससे योगा के दौरान शरीर लचीलेपन की इजाजत नहीं देता। फिर भी अपनी सीमाओं के बावजूद गर्भवती महिलाएं योग के कुछ चुनिंदा आसन का इस्तेमाल करके चुस्त-दुरुस्त रह सकती हैं। प्रतिदिन योगा करने से असामान्य रक्तचाप की समस्या समाप्त हो जाती है और शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा आप टी.वी. शो के माध्यम से या फिर योगा क्लास ज्वाइन कर भी इसका भरपूर लाभ उठा सकती हैं।

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चलना- हमारे रोजमर्रा का जिंदगी में टहलना सबसे अच्छा व्यायाम माना जाता है। इसलिये सुबह शाम हमें टहलना चाहिये और कोशिश भी यही करें कि जब ज्यादा ही जरूरत पड़े तभी वाकिंग का सहारा लें।

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तैराकी- हमारे शरीर की कोशिकाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिये तैराकी सबसे अच्छा व्यायाम माना जाता है और इसके साथ में इसमें आनंद और मजा भी भरपूर आता है। गर्भकाल के दौरान महिलाओं के लिए यह काफी अच्छा व्यायाम है। इसके लिये गर्भवती महिलाओं के लिये अलग से स्वीमिग सेंटर भी बनाये गए हैं।

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वेट लिफ्टिंग- वजन उठाने से शरीर में जोश व स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही मांसपेशियों व जोड़ों का कसाव, लचीलापन व ताकत बढ़ती है। गर्भवती महिलाओं को वेट लिफ्टिंग करते समय थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिये। जिससे वजन उठाते समय कोई घटना या चोट ना लगे।

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गर्भकाल के दौरान यहां हमने कुछ हल्के और जरूरी टिप्स आपको बताये। जिसे देखें और परखें, ये आपके स्वास्थ के लिये काफी उपयोगी सिद्ध होंगे। और अधिक बातें जानने के लिये हमारा ब्लॉग जरूर पढ़ें और दिए गए टिप्स को अपनाएं…जिससे आप इसका उचित फायदा उठा सकें…